दिल्ली में गहराया जल संकट, भीषण गर्मी के बीच बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग
Water Crisis Deepens in Delhi
नई दिल्ली। Water Crisis Deepens in Delhi; गर्मी के प्रकोप के साथ ही दिल्ली के कई इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। जल बोर्ड की उदासीनता के कारण लोग बूंद- बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। स्थिति यह है कि बार- बार शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं हो रहा है।
मॉडल टाउन के आर ब्लाक में पिछले चार दिनों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। यहां के 75 वर्षीय बुजुर्ग निवासी प्रेम नाथ सिंघल ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि भगवान से प्रार्थना है कि ऐसी स्थिति फिर कभी उत्पन्न न हो, भले ही मौत आ जाए। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, पानी का संकट भी गहराता जा रहा है।
यहां पांच हजार से अधिक आबादी रहती है। इस संबंध में जल बोर्ड के अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। अब तो हालात ये हैं कि निवासियों को अधिकारियों के पास जाकर शिकायत करने में भी शर्म महसूस होने लगी है।
दूसरी तरफ, मुखर्जी नगर स्थित रायल पार्क की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। यहां के निवासी उज्जवल सिंह बक्शी ने बताया कि इस भीषण गर्मी में पिछले एक सप्ताह से घरों के नलों में अत्यधिक गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है। यह पानी इस कदर दूषित है कि लोग इसका उपयोग रोजमर्रा के घरेलू कार्यों या साफ-सफाई में भी नहीं कर पा रहे हैं।
इस गंभीर विषय पर रायल पार्क एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जल बोर्ड में कई बार गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या समाधान नहीं मिला। सरकारी तंत्र से निराश होकर अब लोग अपनी इस बुनियादी समस्या को इंटरनेट मीडिया पर साझा कर न्याय की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा जल संकट की यह भयावह तस्वीर दिल्ली के कई अन्य बड़े हिस्सों में भी साफ देखी जा सकती है। नबी करीम, मोतिया खान, मलका गंज, बलजीत नगर, आनंद पर्वत, राजेंद्र नगर, चावड़ी बाजार, बीआर कैंप और संजय गांधी कैंप जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी पेयजल की भारी किल्लत मची हुई है।
इंद्रपुरी की स्थानीय निवासी पोनमुदी लक्ष्मण ने कहा कि यहां के लोग पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हो चुके हैं। पानी हासिल करने के लिए लोगों को तपती धूप में सड़कों पर लंबी कतारें लगाकर घंटों टैंकर का इंतजार करना पड़ता है। कई बार जब दो-तीन दिनों तक टैंकर नहीं आता, तो इस भीषण गर्मी और उमस में लोगों को बिना नहाए-धोए ही गुजारा करना पड़ता है।